Tuesday, August 11, 2009

धैर्य -एक कसौटी

धर्मपुर नगरी का राजा बहुत पराक्रमी और धर्मप्रिये था। उसकी कीर्ति चारों दिशाओं में फैली हुई थी लेकिन साथ ही साथ वह बहुत जिद्दी था। एक बार राजा ने शाही जोहरिओं को दरबार में बुला कर उनसे कहा कि मुझे अभी इसी समय हीरे की परख करना सिखा दो ,नहीं तो प्राण दंड भुगतने को तैयार हो जाओ। यह सुन जोहरिओं के पांव तले की धरती ही खिसक गई। वे सोचने लगे एक ही पल में हीरे की परख राजा को कैसे सिखाएँ ?तभी एक वृद्ध अनुभवी जोहरी आगे बढ़ा और बोला ,"मैं राजा को सिखाऊंगा ,पर मेरी एक शर्त है। राजा जी वचन दो तो कहूँ। "राजा बोला ,"हाँ हाँ मैं तैयार हूँ ,मांगो क्या मांगते हो ?कोशाधयक्ष !दे दो जोहरी को लाख -करोड़ जो भी इसे चाहिए । "जोहरी बोला ,"राजन मुझे धन नहीं चाहिए बल्कि जिज्ञासा है राजनीति सीखने की ,और वह भी अभी इसी समयं। आप शर्त पूरी कीजिये और हीरे की परख की विद्या ले लीजिये । "राजा बोला ,"परन्तु यह कैसे सम्भव है ?राजनीति सीखने के लिए तुम्हे वर्षों हमारे मंत्री के पास रहना पड़ेगा। "यह बात सुन जोहरी बोला ,"बस तो हीरे की परख की विद्या भी आपको बरसों मेरी दुकान पर रह कर ही मिलेगी। "जोहरी की बात सुन कर राजा को सदबुद्धि आ गई।
इसी प्रकार धर्म सम्बन्धी बात को कोई थोडी ही देर में सुनना व् सीखना चाहे तो यह बात असंभव है। उसे वर्षों रहना पड़ेगा ज्ञानी के संग में ,वर्षों सुनना होगा उसके विवेचन को -------।

1 comment:

  1. सुन्दर। शिक्षाप्रद कहानी

    आभार

    मुम्बई टाईगर

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